पाकिस्तान दुनिया भर में कजिन मैरिज के मामलों में पहले स्थान पर आता है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, यहां लगभग 61.2% शादियां रक्त संबंधों के भीतर होती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी शादियों से बच्चों में जेनेटिक डिसऑर्डर और गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
लेकिन हाल ही में नेचर में प्रकाशित एक नई स्टडी ने हैरान कर देने वाले नतीजे पेश किए हैं। इसमें पाया गया कि पाकिस्तान में लगभग 34,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें ‘ह्यूमन नॉकआउट’ कहा जाता है — यानी उनके शरीर में कम से कम एक जीन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है, लेकिन इसका उनकी सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
क्या है ‘ह्यूमन नॉकआउट’?
जब शरीर का कोई जीन पूरी तरह गायब हो जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो उसे ह्यूमन नॉकआउट कहा जाता है। रक्त संबंधों में शादी होने से बच्चों को माता-पिता दोनों से एक जैसे म्यूटेशन मिलते हैं, जिससे कुछ जीन पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं।
स्टडी के प्रमुख निष्कर्ष
- पाकिस्तान के 1,73,303 जीनोम का आकलन किया गया।
- लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति में कम से कम एक जीन गायब पाया गया।
- करीब 6,500 जीन ऐसे मिले जो पूरी तरह स्विच ऑफ हो चुके थे।
- कुछ जीन जैसे RXFP1 और PRDM9, जो चूहों में जरूरी माने जाते थे, इंसानों में गायब होने पर भी कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं दिखी।
- जिन लोगों में CIDEB जीन नहीं था, वे लिवर की बीमारियों से सुरक्षित पाए गए।
वैज्ञानिकों के लिए अवसर
इस तरह की रिसर्च से पता चलता है कि कौन से जीन इंसानों के लिए वास्तव में जरूरी हैं और कौन से नहीं। इससे दवाओं की खोज और निर्माण में नए रास्ते खुल सकते हैं। उदाहरण के लिए, CIDEB इनहिबिटर्स भविष्य में फैटी लिवर जैसी बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं।
भारत का संदर्भ
भारत में भी जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट के तहत 9,768 स्वस्थ लोगों के DNA का अध्ययन किया गया। इसमें लगभग 4.4 करोड़ नए जेनेटिक वैरिएंट्स मिले जो ग्लोबल डेटाबेस में दर्ज नहीं थे।